Saturday, April 5, 2025
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झारखंड में बैकफुट पर क्यों आ गयी बीजेपी?

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Ranchi : महाराष्ट्र में जीत और झारखंड में हार गयी बीजेपी! हिमंता-शिवराज की बिसात पर घुसपैठ के पासे इन्होंने फेंके लेकिन झारखंड की जनता उनके पासे को लपकने को तैयार नहीं है, यह जनादेश में उसने बता दिया है। बीजेपी अपने दायरे को बढ़ाने में पूरी तरह से विफल रही है, इसकी वजह भी साफ है कि असम और मध्यप्रदेश का समीकरण यहां की जनता को स्वीकार नहीं। असम के हिमंता और मध्यप्रदेश के शिवराज प्रभारी बनकर आये, अफवाहों को हवा देने में लगे रहे। वहीं जेएमएम गठबंधन ने ग्राउंड स्तर पर काम किया और चुनाव की घोषणा के ठीक पहले मंईयां योजना लागू कर उनके घुसपैठ के मुद्दे को हवा में उछाल दिया। मतदान के दिन महिला वोटरों की भागीदारी यह दिखा रही थी कि मंईयां सम्मान योजना का असर झारखंड की चुनावी फिजा में है और इसका असर नतीजों में साफ दिखाई भी देगा। हुआ भी वही। बीजेपी घुसपैठ का गोगो दीदी योजना सहित पांच प्रणों को लेकर चुनावी समर की तैयारी में जुटी थी, तो जेएमएम ने अपनी सप्तऋषि घोषणा पत्र से उसके पंच प्रणों के 25 संकल्पों को धूल चटा दी। राज्य की करीब 65 फीसदी सीटों पर इंडिया गठबंधन की जीत यह इशारा कर रही है कि मोदी मैजिक पर राजनीति करने वाले बीजेपी क्षत्रपों के लिये झारखंड की माय, माटी और बेटी को समझना आसान नहीं रहा है! इसमें कोई शक नहीं है कि हेमंत-कल्पना की शानदार जोड़ी ने अपने दम पर चुनावी प्रचार कर इंडिया गठबंधन की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भले ही कांग्रेस और अन्य गठबंधन के सहयोगी दल प्रचार के मामले में पीछे रहे हों लेकिन कल्पना-हेमंत ने गठबंधन धर्म को निभाते हुए कांग्रेस और आरजेडी की जीत की जमीन तैयार करने में मदद की है।

ग्राउंड स्तर पर तैयारी

एक तरफ जहां बीजेपी सोशल मीडिया पर करोड़ों रूपये फूंक कर तरह-तरह के प्रोपगैंडा फैलाकर चुनाव प्रचार कर रही थी वहीं जेएमएम के हेमंत और कल्पना सधी जुबान से लोगों के बीच जाकर चुनाव प्रचार कर रहे थे । मतदाताओं को यह बताने में वह सफल रहे कि बीजेपी के चुनावी प्रोपगैंडा समाज को बांटने का है और वह इस चुनाव में हिन्दू-मुस्लिम कार्ड खेलकर वोटरों को भटकाने का काम कर रही है। उन्होंने सरकार की योजनाओं को कार्यान्वयन में जमीन स्तर पर काम किया और जिस वक्त हेमंत जेल में थे उसे वक्त पूरी कमान कल्पना सोरेन ने संभाली और जनता के बीच जाकर उन्हें बताने का प्रयास किया कि बीजेपी किस तरह से ईडी-सीबीआई का इस्तेमाल कर सरकार के विकास कार्यों को उलझाने का काम कर रही है।

लगातार दूसरी बार हेमंत

झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 में एक और इतिहास बन गया है कि लगातार दूसरी बार हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री बनेंगे। यह सरकार भले ही गठबंधन के दम पर हो लेकिन इतिहास तो हेमंत सोरेन ने बना दिया है। झारखंड में पहली बार आरजेडी ने सबसे ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज की है। देवघर से सुरेश पासवान ने वापसी की है तो चंदनकियारी से नेता प्रतिपक्ष अमर बाउरी को जेएमएम के कैंडिडेट ने मात दे दी है। लिहाजा, राज्य पूरी तरह से युवा हो चुका है, 24 साल हाल ही में राज्य के पूरे हुए हैं। हेमंत के सामने चुनौतियों को पहाड़ है लेकिन राज्य की जनता जानती है कि मुसीबत से लड़ना हेमंत को बेहतर तरीके से आता है। उम्मीदें हेमंत की कसौटी पर खरी उतरी हैं तो जाहिर है कि हेमंत के सामने चुनौतियां भी खड़ी दिखाई देंगी।

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