Saturday, April 5, 2025
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वक्फ बिल संशोधन पर बिहार की राजनीति में बवाल, जेडीयू के चार नेताओं ने दिया इस्तीफा

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KhabarMantraLive: बिहार की राजनीति में वक्फ बिल संशोधन को लेकर घमासान तेज हो गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के इस बिल के समर्थन के बाद अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के कई नेताओं ने नाराजगी जाहिर की है। पार्टी के भीतर इस फैसले को लेकर असंतोष इस कदर बढ़ा कि चार नेताओं ने इस्तीफा दे दिया।

वक्फ बिल पर जेडीयू के समर्थन से नाराज होकर अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव मोहम्मद शाहनवाज मलिक, प्रदेश महासचिव सिए मो. तबरेज सिद्दीकी अलीग, भोजपुर के पार्टी सदस्य मो. दिलशान राईन और पूर्व प्रत्याशी मोहम्मद कासिम अंसारी ने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया। इन नेताओं ने आरोप लगाया कि जेडीयू ने मुस्लिम समुदाय के साथ विश्वासघात किया है और यह फैसला पार्टी की सेक्युलर छवि के खिलाफ है।

जेडीयू का पलटवार- इनका पार्टी से कोई संबंध नहीं

जेडीयू ने इन इस्तीफों को कोई खास तवज्जो नहीं दी और कहा कि जिन नेताओं ने इस्तीफा दिया है, वे पार्टी से पहले ही अलग हो चुके थे। जेडीयू की जिला अध्यक्ष मंजू देवी ने कहा कि मोहम्मद कासिम अंसारी पहले ही निष्कासित किए जा चुके हैं और वे जेडीयू के अधिकृत सदस्य नहीं थे।

पूर्व MLC ने भी जताया विरोध

वक्फ बिल के मुद्दे पर जेडीयू के पूर्व विधान पार्षद (MLC) मौलाना गुलाम रसूल बलियावी और वर्तमान MLC गुलाम गौस ने भी विरोध जताया है। उनका कहना है कि इस बिल के जरिए वक्फ बोर्ड की जमीन को प्रभावित किया जा सकता है, जिससे मुस्लिम समुदाय के कल्याण से जुड़ी योजनाओं पर असर पड़ेगा।

कानूनी लड़ाई की तैयारी

वक्फ बिल के खिलाफ अब कानूनी लड़ाई की तैयारी भी शुरू हो गई है। एदारा-ए-शरिया के अध्यक्ष और पूर्व MLC मौलाना गुलाम रसूल बलियावी ने कहा कि इस मुद्दे पर देशभर के हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की जाएंगी। लीगल सेल की बैठक बुलाकर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

क्या है विवाद?

दरअसल, जेडीयू ने लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पर केंद्र सरकार का समर्थन किया था। इससे पार्टी के कई मुस्लिम नेताओं में नाराजगी फैल गई। इनका मानना है कि यह फैसला मुस्लिम समुदाय के हितों के खिलाफ है। हालांकि, जेडीयू नेतृत्व ने इस विवाद को ज्यादा तवज्जो न देते हुए इसे पार्टी का सामूहिक निर्णय बताया है।

इस विवाद के चलते बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अब देखना होगा कि जेडीयू इस असंतोष को कैसे संभालती है और इस मुद्दे पर आगे क्या रुख अपनाया जाता है।

 

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