रांची: सदान विकास परिषद की केंद्रीय समिति की बैठक पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत केंद्रीय कार्यालय, डिप्टी पड़ा, रांची में संपन्न हुई। इस महत्वपूर्ण बैठक में झारखंड के लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, पाकुड़, साहिबगंज सहित विभिन्न अनुसूचित क्षेत्रों के लोगों ने भाग लिया। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि सदान समाज के हित की बात करने वालों का ही समर्थन किया जाएगा।
बैठक में पेसा कानून को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिला। वक्ताओं ने कहा कि यह कानून झारखंड में निवास करने वाले 80% सदान समुदाय के खिलाफ है और उनके मौलिक अधिकारों का हनन करता है। परिषद के केंद्रीय अध्यक्ष प्रो. पांडे हिमांशु नाथ राय ने कहा कि सदान समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए ही वर्ष 1987 में सदान विकास परिषद का गठन किया गया था। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि पेसा कानून लागू कर सदान समाज के साथ अन्याय किया जा रहा है।
सरकार को सौंपा जाएगा ज्ञापन
बैठक में निर्णय लिया गया कि जल्द ही केंद्रीय समिति झारखंड के राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपेगी। कार्यकारी अध्यक्ष अरुण कश्यप ने कहा कि सदान समाज के हित में किसी भी आंदोलन के लिए तैयार रहना होगा और इसके लिए जागरूकता अभियान तेज किया जाएगा।
जातीय जनगणना कराने की मांग
जमशेदपुर पूर्वी सिंहभूम के प्रतिनिधि सत्य प्रकाश ने मांग की कि झारखंड सरकार को जातीय जनगणना कराकर सदान समाज की वास्तविक सूची सार्वजनिक करनी चाहिए। परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि जो सदान समाज की बात करेगा, वही झारखंड पर शासन करेगा।
सदान समाज को आदिवासी का दर्जा देने की मांग
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि झारखंड के असली आदिवासी सदान ही हैं, अनुसूचित जनजातियों को आदिवासी कहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की कि सदान समाज की जनगणना कराकर उनके अधिकार सुनिश्चित किए जाएं।
सदान समाज का अपना कार्यालय बनेगा
कार्यक्रम के मुख्य संयोजक विजय महतो ने कहा कि जल्द ही सदान विकास परिषद का विधिवत कार्यालय और जमीन होगी, जिससे संगठन को और मजबूती मिलेगी।
बैठक में शामिल प्रमुख लोग
इस बैठक में डॉ. दिलीप सोनी, विजय पाठक, मनोज वर्मा, डॉ. सत्य प्रकाश मिश्रा, उपेंद्र सिंह, अब्दुल खालिक, लालचंद महतो, अजीत विश्वकर्मा, अशोक कुमार, राजेश प्रसाद खन्ना, माथुर प्रसाद महतो सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।