Ranchi: ऊषा मार्टिन माइंस घोटाला मामले में अभियुक्त नंद किशोर पटोदिया ने आज रांची CBI की विशेष अदालत में Surrender कर दिया है। इसके बाद अर्जी पर उसे अदालत ने उन्हें सशर्त जमानत दे दी है। पटोदिया को 25-25 हजार रुपये के दो निजी मुचलकों और पासपोर्ट जमा करने की शर्त पर जमानत दी गयी है। यह मामला वर्ष 2005 में उषा मार्टिन को माइंस आवंटन में हुए कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा है। इसमें पूर्व माइंस सेक्रेटरी और रिटायर्ड IAS अफसर अरुण कुमार सिंह के अलावा तत्कालीन खनन निदेशक इंद्रदेव पासवान, नंद किशोर पटोदिया समेत ऊषा मार्टिन प्रबंधन के दो अन्य लोग भी आरोपी हैं।
माइंस के आवंटन में नियमों का उल्लंघन का लगा था आरोप
वर्ष 2005 में उषा मार्टिन कंपनी को पश्चिमी सिंहभूम जिले के घाटकुरी स्थित आयरन ओर माइंस आवंटित किया गया था। इस माइंस के आवंटन में कथित रुप से भ्रष्टाचार का मामला सामने आया था। आरोप लगा कि माइंस के आवंटन में नियमों का उल्लंघन किया गया। जिस वक्त यह गड़बड़ी सामने आयी, उस समय अरुण कुमार सिंह झारखंड के माइंस सेक्रेटरी थे। गड़बड़ियों की शिकायत पर सीबीआई की दिल्ली इकाई ने कथित आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत में वर्ष 2016 में एक FIR (220/2016) दर्ज कराई थी। इसमें उषा मार्टिन के प्रमोटर और खनन विभाग के अधिकारी भी आरोपी बनाये गये थे।
कथित रूप से उषा मार्टिन के लिये पक्षपात का भी लगा आरोप
CBI की ओर से दर्ज कराये गये FIR में कहा गया है कि आयरन ओर माइंस के आवंटन के लिए केंद्र सरकार को जो सिफारिश भेजी गयी थीं, उसमें राज्य सरकार के अधिकारियों ने कथित रूप से उषा मार्टिन के लिये पक्षपात किया था। वहीं, कंपनी की ओर से कथित तौर पर वादा किया गया था कि वह हाट गम्हरिया स्थित अपने इस्पात संयंत्र में लौह अयस्क का उपयोग करेगी। कंपनी ने राज्य सरकार को एक अंडरटेकिंग भी दी थी, लेकिन वर्ष 2012 में कंपनी ने इसे बेचने का विज्ञापन अखबार में दिया था। इसपर विभाग ने आपत्ति जताई थी।
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