KhabarMantraLive : बदन पर गेरूआ भभूत लगाकर झारखंड के चुनावी समर में कूदी बीजेपी अब खामोशी से सत्ता पर इंडिया के दोबारा ताजपोशी का नजारा देखेगी..! असम में हुए उपचुनाव में बेशक बीजेपी की जीत पर हिमंता ताल ठोंके लेकिन झारखंड में उनकी रणनीति भोथरी साबित हो चुकी है। तीन महीने से ज्यादा वह झारखंड के विभिन्न जिलों में भटकते रहे लेकिन जनता के मूड को समझने में वह फेल रहे! तोड़ जोड़ की राजनीति में भले ही वह सफल रहे हों लेकिन खोटे सिक्कों पर चला दाव औंधे मुंह गिरा और नतीजे उम्मीद के विपरीत आये! राज्य में बीजेपी की सीटें 25 से सिकुड़ कर 21 पर आ गयी! फोल्डर के सहयोगी दल भी नकारा साबित हुए! बीजेपी चुनाव में एग्जाम पेपर लीक मामले को लेकर कूदी जरूर थी लेकिन उसने घुसपैठ के मुद्दे को हवा देकर अपने उपर सांप्रदायिकता का चस्पा जड़ लिया! युवा वोटरों को रिझाने के लिये एग्जाम पेपर लीक का मुद्दा तो उठाया था लेकिन उसे डस्टबीन में डाल दिया! यही गलती बीजेपी को मंहगी पड़ी, नये वोटर उससे जुड़ नहीं पाये! दूसरी बात यह है कि हेमंत सोरेन की सरकार पर लगातार हमला, आरोपों की बोली में बदजुबानी, ईडी-सीबीआई की चुनाव के दौरान इंडिया गठबंधन नेताओं के यहां दबिश ने एंटी बीजेपी माहौल तैयार किया और इंडिया ने उसका फायदा उठाकर वोटरों को गोलबंद करने में सफलता हासिल की।
आदिवासी वोटर्स को टर्नअप करने में BJP फेल
एसटी आरक्षित 28 सीटों में से मात्र एक सीट पर बीजेपी को जीत हासिल हुई। मतलब साफ है कि आदिवासी वोटर्स को टर्नअप करने में बीजेपी पूरी तरह से फेल हो गयी! संथाल की 18 सीटों में से एक सीट पर सफलता मिली, वह भी काफी जद्दोजहद के बाद। बाबूलाल मरांडी कहने को संथाल के नेता कहे जाते हैं, लेकिन वह धनवार क्षेत्र से बाहर अपना जलवा नहीं दिखा पाये! हेमंत की जीत यह बता गई कि आदिवासी के वह सर्वमान्य नेता बन चुके हैं! बाबूलाल मरांडी अब संथाल में स्वीकार नहीं हैं! वहीं कोल्हान में जिस जोश-खरोश के साथ चंपाई की बीजेपी में एंट्री हुई थी, उसने भी बीजेपी को निराश ही किया! कोल्हान की 14 में से तीन सीटों पर एनडीए ने जीत दर्ज की। चंपाई सोरेन ने भले ही अपनी सीट बचा ली हो लेकिन वह अपने बेटे बाबूलाल सोरेन की हार को घाटशिला से जीत में तब्दील नहीं कर सके! कोल्हान के अर्जुन मुंडा पूरे चुनावी समर में खामोश रहे और चुपचाप अपनी पत्नी मीरा मुंडा के लिये पोटका की पिच पर बैटिंग करते रहे। इसके बाद भी मीरा मुंडा पोटका से हार गईं। पलामू की 9 सीटों में से पांच सीटों पर एनडीए ने जीत दर्ज की है! जिसमें एक सीट लोजपा के खाते में गई है! वहीं बीजेपी के पंच प्रण के 25 संकल्पों पर हेमंत के सात संकल्प भारी पड़े और जेएमएम 30 सीटों से बढ़कर 34 सीटों पर काबिज हो गई! कांग्रेस को उम्मीद से ज्यादा सीटें आईं और वह लगातार दूसरे विधानसभा चुनाव में 16 का आंकड़ा हासिल करने में सफल रही है! जबकि आरजेडी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्य के चार सीटों पर जीत हासिल की!
सोसल मीडिया पर दुष्प्रचार
बीजेपी पर सोसल मीडिया का शैडो पेज बनाकर दुष्प्रचार करने का भी आरोप लगा। इसकी शिकायत चुनाव आयोग तक पहुंची और आयोग के निर्देश पर एक विज्ञापन को भी हटाना पड़ा! हेमंत ने बीजेपी पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा था कि बीजेपी सोसल मीडिया पर शैडो पेज के माध्यम से हिन्दू-मुस्लिम से जुड़े दुष्प्रचार करवा रही है और इस पर पार्टी ने करीब पांच सौ करोड़ रूपये खर्च किये हैं! शैडो पेज की पूरी लिस्ट जेएमएम ने मीडिया के साथ शेयर की थी! वहीं बंटेंगे तो कटेंगे की तर्ज पर एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे के नारे दिये गये! हिमंता- शिवराज चुनाव के अगुआ थे..! बीजेपी की आइटी सेल पूरे चुनाव में एक्टिव तो दिखाई दी लेकिन प्रचार में जातिवाद के तड़के का विज्ञापन उसकी शिकस्त की तहरीर लिख गया! जबकि हेमंत मंईयां सम्मान योजना के एक सूत्री कार्यक्रम के तहत चुनावी समर में कूदे थे! कल्पना-हेमंत ही इंडिया के स्टार कैंपेनर थे…! इधर बीजेपी ने पूरे कुनबे को कैंपेनिंग में उतारा तो था लेकिन झारखंडी नेताओं को दरकिनार कर दिया! और ये ही सबसे बड़ी भूल बीजेपी कर बैठी! नतीजा सबके सामने है…! अब आप पूछ भी नहीं सकते कि झारखंड की जनता को ’’ क्या मिला?’’ क्योंकि जनादेश आ चुका है! अब तो केन्द्र को बताना होगा कि झारखंड की जनता का हक ’’ कब मिलेगा?’’
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