Friday, April 4, 2025
spot_img
HomeRajyaJharkhandकोल्हान का चुनावः कहीं पिता-पुत्र तो कहीं मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर

कोल्हान का चुनावः कहीं पिता-पुत्र तो कहीं मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर

Join Our WhatsApp ChannelJoin Now

Ranchi : झारखंड विधानसभा चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिये ताबड़तोड़ चुनावी सभाओं का दौर शुरू हो चुका है। पीएम मोदी से लेकर कांग्रेस के राहुल- खड़गे सहित कई क्षेत्रीय क्षितिज के नेताओं की सभा होने जा रही है। कोल्हान की 14 सीटें एनडीए और इंडिया दोनों के लिये खास बन गयी हैं। वैसे तो कोल्हान और संथाल की 32 सीटों को सत्ता की चाभी कहा जाता है क्योंकि कोल्हान और संथाल क्षेत्र से ही अब तक मुख्यमंत्री चुने गये हैं। लेकिन कोल्हान इस बार खास बना हुआ है। कोल्हान में जहां एक तरफ पिता -पुत्र की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है वहीं वर्तमान सरकार के तीन मंत्रियों की भी नाक का सवाल बन चुकी हैं। सरायकेला विधानसभा सीट जिसे जेएमएम का गढ़ कहा जाता है, और वहां लगातार चंपाई सोरेन जेएमएम की टिकट पर चुनाव जीतते रहे हैं, लेकिन इस चुनाव में वह बीजेपी की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट पर चंपाई की हार जीत उनके राजनीतिक भव्ष्यि का फैसला करेगी। इसलिये जेएमएम इस सीट को लेकर काफी माथापच्ची कर रही हैं।

घाटशिला में मंत्री रामदास सोरेन बनाम बाबूलाल सोरेन

घाटशिला विधानसभा में दो सोरेन आमने-सामने हैं। झारखंड के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन और पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन के बीच खिताबी टक्कर होने वाली है। रामदास को जहां अपना किला बचाने की चिंता परेशान कर रही है वहीं चंपाई अपने बेटे बाबूलाल सोरेन के राजनैतिक करियर को लेकर परेशान हैं। बाबूलाल सोरेन 6 महीने पहले जेएमएम के लिये काम कर रहे थे लेकिन चंपाई के बीजेपी में शामिल होने के बाद उपहार के रूप में बाबूलाल सोरेन को यहां से अपना कैंडिडेट बनाया है। 2014 के चुनाव में यह सीट बीजेपी के खाते में गई थी और बीजेपी के लक्ष्मण टुडू ने जेएमएम के रामदास सोरेन को हराया था। 2019 में रामदास सोरेन से हारने वाले लक्ष्मण टुडू अब जेएमएम का हिस्सा हैं और रामदास सोरेन की जीत के लिये घाटशिला में अपना पसीना बहा रहे हैं।

बन्ना बनाम सीएम किलर सरयु राय

पश्चिमी जमशेदपुर सीट से वर्तमान सरकार में मंत्री बन्ना गुप्ता और पूर्वी सिंहभूम से 2019 के विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री पद पर बैठे रघुवर दास को 26 हजार वोटों से हराने वाले सरयू राय के बीच मुकाबला है। सरयू राय रघुवर सरकार में भी खाद्य मंत्री रह चुके हैं। उन्हें राजनीति का चाणक्य कहा जाता है। चुनाव के पहले ही बन्ना गुप्ता और सरयु राय के बीच राजनैतिक तनाव रहा है। कई मौके पर सरयू और बन्ना के बीच तीखी तकरार देखी गयी है। उन्होंने बन्ना पर कई गंभीर आरोप भी लगाये और जांच करने की बात कही थी। लेकिन हेमंत सरकार ने बन्ना के खिलाफ कोई भी जांच नहीं बैठाई। अब चुनावी मैदान में दोनों आमने सामने हैं। इस सीट की खासियत यह है कि यह दोनों के लिये परंपरागत सीट रही है और एक दूसरे को इस सीट से दोनों कैंडिडेट पटकनी देते रहे हैं। सरयू राय ने 2005 और 2014 के चुनावों में बन्ना को हराया था जबकि 2009 के चुनाव में सरयू राय बन्ना गुप्ता से हार गये थे। सरयू राय एनडीए फोल्डर के जेडीयू की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं जबकि बन्ना कांग्रेस की टिकट पर मैदान में हैं।

गीता बलमुचू बनाम दीपक बिरूआ

चाईबासा में जीत की हैट्रिक लगा चुके दीपक बिरूआ का मुकाबला इस बार जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष और एनडीए कैंडिडेट गीता बलमुचू से है। हालांकि दीपक बिरूआ के राजनैतिक कद के आगे गीता की जीत आसान नहीं होने वाली है। यह कांग्रेस का परंपरागत सीट हुआ करती थी और 2009 में बागुन सुम्ब्रई को जेएमएम के टिकट पर दीपक बिरूआ ने शिकस्त दी थी। उसके बाद से ही दीपक बिरूआ लगातार यहां से विधायक रहे हैं और वर्तमान सरकार में वह कल्याण मंत्री हैं। 2014 और 2019 में दीपक बिरूआ बीजेपी के कैंडिडेट जेबी तुबिद को दो बार इस सीट पर शिकस्त दे चुके हैं।

Read More : 

Read More : 

Read More : 

Read More : 

Read More : 

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

News Update

Recent Comments