Ranchi : ऑनलाईन धोखाधड़ी के लिये मशहूर जामताड़ा वर्तमान में राजनीति का अखाड़ा बना हुआ है। जामताड़ा में स्कैम को लेकर वेबसीरिज भी बन चुकी है और आज इस विधानसभा का नाम पूरी दुनिया के लिये एक जाना पहचाना नाम हो गया है। साथ ही झारखंड के बेबाक नेताओं की सूची में शुमार इरफान अंसारी यहां के विधायक हैं और कांग्रेस की टिकट में चुनावी मैदान में हैं। झारखंड में जामताड़ा को तीन वजह से जाना जाता है। पहला तो यह ईश्वरचंद विद्यासागर की कर्मभूमि रही है। दूसरा यह कि इस इलाके में ऑनलाईन धोखाधड़ी के एक्सपर्ट पाये जाते हैं, जो आपके खाते की राशी को चुटकियों में उड़ा लेते हैं। वहीं, राजनीतिक लिहाज से इसकी पहचान इरफान अंसारी के राजनीतिक लफ्फाजी अन्दाज से जानी जाती है। इस सीट पर कांग्रेस मजबूत रही है लेकिन कई मौके ऐसे भी आये हैं जब बीजेपी और जेएमएम ने जीत का स्वाद चखा है। विधानसभा चुनाव में इरफान का मुकाबला बीजेपी की कैंडीडेट सीता सोरेन से है जो हेमंत सोरेन की भाभी भी हैं। सीता सोरेन के चुनाव मैदान में उतरने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है।
समाज सुधार का गढ़ अब बना साइबर क्राइम हब
जामताड़ा को दुमका जिले से अलग करके नया जिला बनाया गया था। इसके उत्तर में देवघर, पूर्व में दुमका, पश्चिम में प. बंगाल और दक्षिण में गिरिडीह जिला है। जामताड़ा देश में साइबर क्राइम का गढ़ माना जाता है। यहां के साइबर क्रिमिनल के निशाने पर देश की कई बड़ी हस्तियां तक आ चुकी हैं। जामताड़ा का इतिहास संथाल परगना से अलग नहीं है। 1855 में इस इलाके को ब्रिटिश जंगलेटेरी (जंगली तराई) कहते थे. इसमें संथाल परगना, हजारीबागमुंगेर और भागलपुर आते थे। जामताड़ा के करमाटांड़ में ही बांग्ला लिपि और बांग्ला भाषा के पितामह कहे जाने वाले ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने अपने जीवन के अंतिम 18 वर्ष बिताये। करमाटांड में वे केवल संथालों के साथ रहे ही नहीं बल्कि उन्होंने उनके सामाजिक उत्थान के लिए भी काफी प्रयास किया। उन्होंने संथाल की लड़कियों के लिए सबसे सबसे पहला औपचारिक विद्यालय प्रारम्भ किया जो शायद हमारे देश का संभवतः पहला औपचारिक बालिका विद्यालय था। विधवा विवाह के लिए बड़ा काम किया. उन्हीं के प्रयास से सरकार ने विधवा विवाह को मान्यता दी।
जामताड़ा विधानसभा सीट पर कांग्रेस का दबदबा
जामताड़ा विधानसभा सीट की बात की जाए तो साल 2009 से 2014 के कार्यकाल को छोड़ दे तो 1982 से अब तक कांग्रेस के एक ही परिवार के नेताओं का यहां लगातार कब्जा रहा है। बिहार सरकार में मंत्री रहे फुरकान अंसारी जामताड़ा विधानसभा सीट से लगातार पांच बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। जबकि वर्तमान समय में उनके पुत्र इरफान अंसारी लगातार 10 वर्षों से जामताड़ा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। जिस कारण यह माना जा सकता है कि जामताड़ा जिला कांग्रेसियों का अभेद किला है। जिसे एक ही परिवार के सदस्य बचाए हुए हैं। यही नहीं इसे ध्वस्त करने के लिए विरोधियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।
पहली बार हाईकोर्ट के निर्देश पर विजय घोषित हुए थे फुरकान
वर्ष 1980 के चुनाव में जामताड़ा विधानसभा सीट पर फुरकान अंसारी चुनाव लड़े थे और उनके प्रतिद्वंदी कम्युनिस्ट पार्टी से वीरू बोस थे। मतगणना के दौरान वीरू बोस को विजय घोषित कर दिया गया। लेकिन इसके विरोध में फुरकान अंसारी न्यायालय के शरण में गए और 1982 में कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीरू बोस की दावेदारी रद्द कर दी। उसके बाद फुरकान अंसारी लगातार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते रहे और 2004 तक जामताड़ा विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया।
करीब 35 साल से जामताड़ा में एक ही परिवार का कब्जा
हालांकि 2004 के लोकसभा चुनाव में फुरकान अंसारी ने कांग्रेस की टिकट पर गोड्डा से चुनाव लड़ा और वहां से वो विजय घोषित हुए। लेकिन 2009 में फुरकान अंसारी एक बार फिर जामताड़ा विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन उन्हें जेएमएम प्रत्याशी विष्णु भैया से हार का सामना करना पड़ा। वही उसके बाद 2014 में फुरकान अंसारी के पुत्र इरफान अंसारी ने कांग्रेस के टिकट पर जामताड़ा से चुनाव लड़े और वह विजय घोषित हुए। 2019 के चुनाव में भी इरफान अंसारी ने जीत दर्ज की। जिस कारण यह कहा जा सकता है कि 35 साल से जामताड़ा विधानसभा सीट पर एक ही परिवार के लोगों का कब्जा है।
वर्ष 2019 में जामताड़ा चुनाव परिणाम | ||
उम्मीदवार का नाम | पार्टी | प्राप्त मत |
इरफान अंसारी | कांग्रेस | 112829 |
वीरेंद्र मंडल | भाजपा | 74088 |
वर्ष 2014 में जामताड़ा चुनाव परिणाम | ||
उम्मीदवार का नाम | पार्टी | प्राप्त मत |
इरफान अंसारी | कांग्रेस | 67486 |
वीरेंद्र मंडल | भाजपा | 58349 |
वर्ष 2009 में जामताड़ा चुनाव परिणाम | ||
उम्मीदवार का नाम | पार्टी | प्राप्त मत |
विष्णु प्रसाद भैया | जेएमएम | 62794 |
फुरकान अंसारी | कांग्रेस | 49952 |
अन्य पार्टी ने भी चखा है जीत का स्वाद
जामताड़ा विधानसभा सीट कांग्रेस का गढ़ रहने के बाद भी यहां पर कई अन्य राजनीति पार्टी के प्रत्याशियों ने जीत का स्वाद चखा है। जानकारी के अनुसार 1952 में सोशलिस्ट पार्टी से कृष्णा देवदास यहां विधायक बने। 1957 में कम्युनिस्ट पार्टी के शत्रुघ्न बेसरा ने जीत दर्ज की। 1962 में कांग्रेस प्रत्याशी काली प्रसाद सिंह ने जीत दर्ज। 1967 और 1969 में भीं काली प्रसाद सिंह ने जीत हासिल की। 1972 में दुर्गा प्रसाद सिंह कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित घोषित हुए। 1977 में भी दुर्गा प्रसाद सिंह कांग्रेस के टिकट पर जीते। 1980 के पहले कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार को विजयी घोषित किया गया, लेकिन अदालत के आदेश के बाद कांग्रेस के फुरकान अंसारी को 1992 में विजयी घोषित किया गया। इसके बाद से वो 2004 तक लगातार जामताड़ा के विधायक रहे। वर्ष 2005 में भाजपा से विष्णु भैया यहां जीते। 2009 में विष्णु भैया ने इस्तीफा दे दिया और उपचुनाव में शिबू सोरेन यहां से विजय घोषित हुए। वहीं 2009 में पुनः विष्णु भैया झामुमो की टिकट पर जीत दर्ज की। लेकिन उसके बाद से यहां कांग्रेस का कब्जा है।
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