अस्पताल के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ कमल गर्ग ने बताया कि डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनका इलाज कर रही है। स्वामी रामभद्राचार्य को मंगलवार शाम सांस लेने में कठिनाई होने लगी थी। जिसके बाद उन्हें तुरंत देहरादून लाया गया।
यह दूसरी बार है जब स्वामी रामभद्राचार्य को श्वास संबंधी समस्या के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया है। गौरतलब है कि इससे पहले फरवरी महीने में भी उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक कथा के दौरान उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। जिसके बाद उन्हें तुरंत देहरादून स्थित सिनर्जी अस्पताल में ही लाया गया। हालांकि बाद में यहां से दिल्ली स्थित एम्स में भी उन्हें ले जाया गया था। जिसके बाद वह स्वस्थ हो गए थे।
जानकारी के लिए बता दें कि जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य भारतीय हिंदू आध्यात्मिक गुरु, संस्कृत विद्वान, कवि और लेखक हैं। इसके साथ ही वह रामचरित मानस के रचयिता तुलसीदास की स्मृति में चित्रकूट स्थित तुलसी पीठ के संस्थापक हैं। जगदगुरू रामभद्राचार्य जी जब 2 महीने के थे तो उनकी आंखों की रोशनी चली गई, उनकी आंखों में ट्रेकोमा नाम की बीमारी हुई थी। बता दें कि नेत्रहीन होने के बावजूद भी उन्हें 22 भाषाओं का ज्ञान प्राप्त है और उन्होंने 80 ग्रंथों की रचना की है।
रामभद्राचार्य ने अयोध्या में राम मंदिर होने की 437 प्रमाण कोर्ट को दिए हैं। स्वामी रामभद्राचार्य ने कहां है वेद में राम जन्म का स्पष्ट प्रमाण दिया गया है कहते हैं रामचरितमानस में स्पष्ट लिखा है की बाबर के सेनापति और दुष्ट लोगों ने राम जन्मभूमि के मंदिर को तोड़कर मस्जिद को बनाया है और कई हिंदुओं को मार डाला तुलसीदास ने इस पर अपना दुख भी प्रकट किया है ।
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