Sunday, April 6, 2025
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मजाक मजाक में…! मुर्गा सही में जिद्दी था…!

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Ranchi : सुबह सुबह मतला की चाय दुकान में चुनावी चर्चा हो रही है…! लुभावन मियां अखबार पढ़ते हुए-.. गजब हो गया… शहर से बढ़िया तो हमरा गांव-ज्वार है, कम से कम वोट तो देने आता है सब..! वहां देखों..! साला वोट से कोई मतलबे नहीं है…! का बकैती कर रहे हो मियां..? दूर से रशिकलाल आवाज लगाते हुए उनके पास आये…! मियां- बैठो महाराज…! और सुनो. .. हमसे बड़ा बकैत तो तुमलोग हो…! आंय-बांय तुमरा पार्टी बकैती करता है…लेना देना कुछो है नहीं…! अच्छा एक बताओ.. पहिलका राउंड खतम हो गया…! का कहते हैं…? 43 में केतना केकरा आयेगा? लुभावन मियां ने रशिकलाल से पूछा। रशिकलाल- सुनो मियां…पहिले चाय पिलाओ… (चाय सुड़कते हुए) हम लोग पहिला राउंड में तुमलोग का पार्टी से आगे हैं..! मियां- घंटा..! झूठा भोकाली करने को कोन्हों वोट मिलता है…? देख लेना हमलोग को कम से कम 25 सीट आयेगा… पहिला राउंड में..! रशिकलाल- का मियां…दिन में सपना आने लगा का…? कोल्हान में हमलोग को 8 सीट आ रहा है, रांची, कांके, हटिया तो पहिले से ही फाईनल है! बाकी का सीट में से 14 सीट और हमलोग का खाता में आ रहा है…! लुभावन मियां… ई बार 3 पर्सेंट ज्यादा वोट गिरा है… समझ रहे हो… ? इसका फायदा किसको मिलेगा..? रशिकलाल- अरे बोका…! मंगरुआ तुमको नहीं बताया कि कैसे खेला हुआ है? राते रात सब सेटिंग हो गया..! मियां- का बे तुमलोग फिर ईवीएम हैक कर लिया है का? रशिकलाल- भक्क..! ये ही खराब लक्षण के कारण चुनाव में तुम लोग को दुर्गति होता है…। जीते तो जनोदश.. नहीं तो ईवीएम बेकार…? मियां- तुमलोग जो जातिवाद का शिगूफा छोड़ा है न, उससे कोई फर्क पड़ेगा…! इतना समझ लो..! रशिकलाल- अबे मियां… ई शिगूफा नहीं है…! सच्चाई है…! तुमरा पार्टी जिद्दी मुर्गा जैसा हो गया है… बात समझवे नहीं करता है…! मियां- ई जिद्दी मुर्गा का होता है महाराज..! तुमरे यहां एक बदमाश मुर्गा है… ? मिया- हां था…! कल ही वोट के बाद पका कर खा लिये…! रशिकलाल- ई तो गड़बड़ कर दिये मियां…! खैर छोड़ो.. खैनी खाओ…! मियां- ठीक बनाये हो..? रशिकलाल- खाओ और असर देखो…! ( लुभावन मियां खैनी खाने के थोड़ी देर बाद) – महाराज! अभी भोरे ही लैट्रिन गये थे फिर प्रेशर बन बन रहा है…! रशिकलाल- जो जिद्दी मुर्गा खाये थे न वो ही बाहर आ रहा है…! मियां- यहीं खेत का अरिया में बैठ जाते हैं…! घर जाते जाते तैमद खराब हो जायेगा…! ( लुभावन मियां संडास करते समय बड़बड़ाते हैं – मुर्गा सही में जिद्दी था का?)

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