Saturday, April 5, 2025
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झारखंड में SHG को 13,659 करोड़ का क्रेडिट लिंकेज, लाखों महिलाएं हुईं सशक्त

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Ranchi: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आजीविका को मजबूत करने के लिए स्वयं सहायता समूहों (SHG) को बैंक क्रेडिट लिंकेज से जोड़ा जा रहा है। दिसंबर 2019 से अब तक 2.67 लाख सखी मंडल बैंकिंग सहायता से लाभान्वित हो चुके हैं। इस दौरान 53,293 से अधिक नए समूह बनाए गए हैं, जिससे राज्य में कुल 2.91 लाख समूह कार्यरत हैं।

राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही इस योजना के तहत क्रेडिट लिंकेज में 14,204 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है, जो 2019 से पहले मात्र 545.30 करोड़ रुपये थी। सरकार के प्रयासों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है और महिलाएं सरल शर्तों पर ऋण लेकर अपने व्यवसाय को बढ़ावा दे रही हैं।

बोकारो की प्रेमलता देवी ने सिलाई से बदली अपनी जिंदगी

चंद्रपुरा प्रखंड की रहने वाली प्रेमलता देवी, जो जीवन ज्योति आजीविका सखी मंडल से जुड़ी हैं, ने क्रेडिट लिंकेज का लाभ उठाकर सिलाई का व्यवसाय शुरू किया। पति की असमय मृत्यु के बाद परिवार चलाने के लिए उन्होंने पहले 50,000 रुपये का ऋण लिया और सिलाई मशीन खरीदी। धीरे-धीरे आमदनी बढ़ने के बाद उन्होंने और 30,000 रुपये का लोन लेकर सिलाई केंद्र खोला। आज प्रेमलता हर महीने करीब 10,000 रुपये कमाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं।

जामताड़ा की किरण झा बनीं सफल महिला उद्यमी

नाला प्रखंड की किरण झा, जो राधा कृष्ण आजीविका सखी मंडल से जुड़ी हैं, ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आचार और पापड़ बनाने का प्रशिक्षण लिया। बैंक से 50,000 रुपये का ऋण लेकर उन्होंने अपना व्यवसाय शुरू किया। आज उनकी वार्षिक आय 1.2 लाख रुपये है और उन्होंने अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ा है। उनके बेटे ने भी डीडीयूजीकेवाई के तहत प्रशिक्षण लिया और अब वह सालाना 3.6 लाख रुपये कमा रहा है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ रहे लाखों परिवार

राज्य सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत अब तक 32 लाख परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न आजीविका के साधनों से जोड़ा गया है। इनमें कृषि, पशुपालन, वनोपज, अंडा उत्पादन और जैविक खेती शामिल हैं।

वन उत्पादों से ग्रामीणों को हो रहा लाभ

झारखंड माइक्रोड्रिप इरिगेशन परियोजना के तहत अब तक 31,861 किसानों को टपक सिंचाई तकनीक से जोड़ा गया है, जिससे उनकी उपज और आमदनी में बढ़ोतरी हुई है।

तकनीक से लैस हो रही हैं ग्रामीण महिलाएं

राज्य में 85,000 से अधिक सामुदायिक कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया है, जिनमें बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट सखी, पशु सखी, कृषि सखी, वनोपज मित्र, आजीविका रेशम मित्र और सामुदायिक संसाधन व्यक्ति (CRP) शामिल हैं। इन्हें आधुनिक तकनीकों की जानकारी देकर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है, जिससे वे अपनी कमाई बढ़ा सकें और अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा दे सकें।

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